-वार्ड 52 में 87 लाख से अधिक के विकास कार्यों का भूमि पूजन,सड़क और नाला निर्माण से नागरिकों को मिलेगी सुविधा,
-बोरसी बस्ती से गणपति विहार और मां कर्मा पीएम आवास तक बनेगी सीसी रोड, जर्जर सड़क से मिलेगी मुक्ति,
दुर्ग/14 अक्टूबर/नगर पालिक निगम, दुर्ग। नगर पालिक निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 52 में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से 87 लाख रुपये से अधिक की लागत के तीन निर्माण कार्यों का भूमि पूजन किया गया। इनमें बोरसी बस्ती से गणपति विहार तक सीसी रोड निर्माण, गणपति विहार से मां कर्मा प्रधानमंत्री आवास सीसी रोड निर्माण तथा बोरसी बिम्लेश्वरी कॉलोनी में नाला निर्माण कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा और जल निकासी व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।भूमिपूजन के दौरान महापौर अलका बाघमार ने कहा कि पूर्व में भी बोरसी क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जा चुके हैं। और आज 88 लाख रुपये से अधिक के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। क्षेत्र में सड़क, नाली सहित अन्य आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए आगे भी निरंतर विकास कार्य कराए जाएंगे, ताकि नागरिकों को बेहतर सुविधा मिल सके।
भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, वार्ड क्रमांक 52 की पार्षद गुलशन गायत्री साहू, सहायक अभियंता हरिशंकर साहू, उप अभियंता करण यादव सहित क्षेत्र के नागरिक उपस्थित में भूमिपूजन किया।
बता दे कि बोरसी वार्ड 52 क्षेत्र में तीन निर्माण कार्यों पर खर्च होंगे 88.40 लाख रुपये प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 52 में बोरसी बस्ती से गणपति विहार तक सीसी रोड निर्माण कार्य के लिए 14.14 लाख रुपये, गणपति विहार से मां कर्मा पीएमएवाई आवास तक सीसी रोड निर्माण कार्य के लिए 27.43 लाख रुपये तथा बिम्लेश्वरी कॉलोनी में नाला निर्माण कार्य के लिए 46.83 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है।
जर्जर सड़कों से मिलेगी राहत, आवागमन होगा आसान।बोरसी बस्ती से गणपति विहार और गणपति विहार से मां कर्मा पीएमएवाई आवास तक सीसी रोड निर्माण होने से स्थानीय रहवासियों को जर्जर सड़कों की समस्या से राहत मिलेगी। सड़क निर्माण से आवागमन की सुविधा बेहतर होगी तथा क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।वहीं, बिम्लेश्वरी कॉलोनी में नाला निर्माण से जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।



