सहस्त्रेश्वर शिवलिंग में जलाभिषेक करने सावन के पहले सोमवार को उमड़े श्रद्धालु
शिवधाम कोड़िया ( नंदकठी ) के विख्यात अनोखे शिव मंदिर में हजार छोटे छोटे शिवलिंग आकार के पत्थरों से बने ‘सहेस्त्रेश्वर भुईं फोड़ शिव ज्योतिर्लिंग’ है। विपरीत मौसम में भी सावन महीने के शुरू दिन ही ज्योतिर्लिंग की पूजा अर्चना एवं आराधना के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा | सावन महीना शिवजी का प्रिय महीना है | इन दिनों की गई पूजा का फल हर मनुष्य को अवश्य ही प्राप्त होता है | इस दिन कई श्रद्धालुओं ने उपवास रख मंत्रों का जाप कर जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक किया | नारियल, बेलपत्र कनेर फूल, धतूरा फूल – अर्पित कर चना दाल, मिश्री, मौसमी फलों का भोग लगाया | मंदिर के पुजारी रमेशबन गोस्वामी द्वारा पहले विशेष पूजा अर्चना, अभिषेक, श्रृंगार आरती किया गया |
पहले सोमवार को हो यहां श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा | भोलेनाथ को सोमवार का दिन अतिप्रिय होता है | वे जलाभिषेक, जलधारा से प्रसन्न हो जाते हैं । भक्तों में काफी उमंग उल्लास है। महादेव का आशीष पाने, पुण्य प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। पूरे महीने मंदिर में काफी भीड़ रहेगी |
सावन मास श्रद्धा का मास है | साधकों, उपासकों, शिव भक्तों के लिए विशेष पुण्य फलदायी माना जाता है | भगवान शिव अपने सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और उनके दुखों का निवारण कर उन्हें सुखी जीवन जीने का वरदान देते हैं | बस, मन में श्रद्धा भाव हो |
डॉ नीलकंठ देवांगन ने बताया कि यहां स्वयंभू भगवान शिव का दिव्य व भव्य ज्योतिर्लिंग है जो ‘भुईं फोड़’ के नाम से विख्यात है, बहुत फुरमानुक माना जाता है | घुरूवा में कुआं खोदते समय नारियल के आकार का लाल भूरे रंग का पत्थर जो काफी मशक्कत के बाद भी नहीं निकला था, आज वही दिव्य भव्य शिवलिंग है जो श्रद्धा और आस्था का केंद्र है | ‘घुरूवा के दिन बहुरथे’ छत्तीसगढ़ी कहावत यहां चरितार्थ है | पुनर्निर्मित मंदिर विशाल है। गर्भगृह में सूर्य प्रभा की आकृति से कांच जड़े गए हैं जिनमें बिंब झलकते हैं। मनोहारी दृश्य प्रस्तुत होता है। शिव आराधना से मोक्ष की प्राप्ति होती है। दर्शन पूजन अभिषेक से आत्मिक शांति मिलती है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।







