18वीं सदी का रहस्यमयी मंदिर ढाई फीट की मूल प्रतिमा पर चढ़े लेप से बनी थी 6 फीट की आकृति 35 साल बाद चोला उतारते ही सामने आया वास्तविक स्वरूप।
।ननकटठी । लोकेश्वर सिंह ठाकुर।
ग्राम ननकटठी का प्राचीन हनुमान मंदिर इन दिनों श्रद्धा और भक्ति के माहौल से गूंज रहा है। शनिवार 14 मार्च को मंदिर में हनुमान जी का पुराना चोला और वर्षों से जमा चंदन-घी-सिंदूर का लेप हटाया गया। करीब 35 वर्ष बाद श्रद्धालुओं को संकटमोचन के वास्तविक, मूल स्वरूप के दर्शन हुए। इस दुर्लभ क्षण को देखकर गांव और आसपास के क्षेत्र के लोग भाव-विभोर हो उठे।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर 18वीं सदी का माना जाता है। हालांकि इसके निर्माण का कोई लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन पीढ़ियों से यह स्थान क्षेत्र की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूल प्रतिमा लगभग ढाई फीट ऊंची है। वर्षों से चढ़ाए जाते रहे चंदन, घी और सिंदूर के लेप के कारण यह आकृति धीरे-धीरे लगभग 6 फीट ऊंची दिखाई देने लगी थी। यही स्वरूप लंबे समय तक भक्तों द्वारा पूजित होता रहा।
करीब 35 साल पहले एक दुखद घटना घटी थी। बताया जाता है कि एक विक्षिप्त व्यक्ति ने उस समय 6 फीट जैसी दिखने वाली आकृति को क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई थी। बाद में जब ग्रामीणों ने चोला और लेप हटाया, तो उसके भीतर से ढाई फीट की मूल और अखंड प्रतिमा सामने आई। इस घटना को लोगों ने चमत्कार मानते हुए मंत्रोच्चार के साथ पुनः प्राण-प्रतिष्ठा कराई और पुराना चोला प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में विधिवत विसर्जित किया गया।
हनुमान मंदिर में प्रतिमा के नीचे दबा हुआ शिखर या आकृति उनकी नकारात्मक शक्तियों पर विजय का प्रतीक होता है। कुछ लोग इसे ‘अहिरावण’ से भी जोड़ते हैं, जिसे हनुमान जी अपने चरणों के नीचे दबाकर भक्तों की रक्षा करते हैं।
इसी परंपरा के अनुसार इस बार भी 14 मार्च को चोला उतारकर मूल प्रतिमा के दर्शन कराए गए। इसके बाद रविवार 15 मार्च को विधि-विधान के साथ चंदन, घी और सिंदूर का नया लेप चढ़ाकर हनुमान जी को नया चोला पहनाया गया।





