दुर्ग। गर्मी से बचाव के लिए प्रशासन की एडवाइजरी।

 

 

*गर्मी व लू से बचाव के लिए प्रशासन की एडवाइजरी*

 

*-लू के लक्षण और इससे बचाव के उपाय बताने आयोजित होंगे जन जागरूकता कार्यक्रम*

 

*-’लू कार्य योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विभागों को मिली जिम्मेदारियां*

 

*-गर्मी में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी सावधानियां*

 

*-लू लगने पर तुरंत क्या करें?*

 

दुर्ग, 02 अप्रैल 2026/ ग्रीष्म ऋतु वर्ष 2026 को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये गये हैं। जिसमें लू के लक्षण, लू से बचाव के उपाय, प्रारंभिक उपचार और आवश्यक सांवधानियां संबंधी आवश्यक निर्देश दिये गये हैं। जिला प्रशासन द्वारा सभी स्वास्थ्य केन्द्रों को लू के लक्षण, लू से बचाव, लू लगने पर प्रारंभिक उपचार हेतु जनसमुदाय में जागरूकता लाने व प्रशिक्षण देने हेतु निर्देशित किया गया है। स्वास्थ्य केन्द्रों में लू से प्रभावित मरीजों का प्राथमिकता से परीक्षण करने के निर्देश भी दिये गये हैं। साथ ही जिले के संबंधित सभी विभागों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए है। प्राप्त जानकारी के अनुसार लू बचाव/उपाय के संबंध में जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।

 

*लक्षण-* सिर से भारीपान और दर्द होना, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान अधिक हो जाने के बाद भी पसीने का न आना, अधिक प्यास और पेशाब कम आना, भूख कम लगना तथा बेहोश होना।

 

*बचाव के उपाय-* लू लगने का प्रमुख कारण तेज धूप और गर्मी से ज्यादा देर तक रहने के कारण शरीर में पानी और खनिज मुख्यतया नमक की कमी हो जाना होता है। अतः इससे बचाव के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए- बहुत अनिवार्य न हो तो घर से बाहर ना जाए। धूप से निकलने से पहले सर व कानों को कपड़े से अच्छी तरह से बांध लें। पानी अधिक मात्रा में पीये और अधिक समय तक धूप में न रहें। गर्मी के दौरान नरम मुलायम सूती कपड़े पहनने चाहिए ताकि हवा और कपड़े पसीने को सोखते रहे। इसी प्रकार अधिक पसीना आने की स्थिति में ओ.आर.एस. घोल पीयें। चक्कर आने, उल्टी आने पर छायादार स्थान पर विश्राम करें तथा शीतल पेय जल अथवा उपलब्ध हो तो फल का रस, लस्सी, मठा आदि का सेवन करें। प्रारंभिक सलाह के लिए 104 आरोग्य सेवा केन्द्र से निःशुल्क परामर्श लिया जाए और उल्टी, सर दर्द, तेज बुखार की दशा में निकट के अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केन्द्र से जरूरी सलाह लिया जाए।

 

*लू लगने पर किये जाने वाला प्रारंभिक उपचार-* बुखार पीड़ित व्यक्ति के सर पर ठण्डे पानी की पट्टी लगावें, अधिक पानी व पेय पदार्थ पिलावें जैसे कच्चे आम का पना, जल जीरा आदि, पीड़ित व्यक्ति को पंखे के नीचे हवा में लिटा देवें, शरीर पर ठण्डे पानी का छिड़काव करते रहें, पीड़ित व्यक्ति को यथाशीघ्र किसी नजदीकी चिकित्सा केन्द्र में उपचार हेतु ले जाए तथा मितानिन ए.एन.एम. से ओ.आर.एस. के पैकेट हेतु संपर्क करें।

 

*क्या करें-* जितना हो सके पर्याप्त पानी पीये, भले ही प्यास न लगी हो। मिर्गी, हृदय, गुर्दे या लीवर से संबंधित रोग वाले जो तरल प्रतिबंधित आहार लेते हो, तरल पदार्थ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें। हल्के, हल्के रंग के, ढीले सूती कपड़े पहने। ओ.आर.एस. (ओरल रिहाइड्रेशन) घोल, घर का बना पेय लस्सी, (तोरानी चावल) का पानी, नींबू का पानी, छांछ आदि का उपयोग करें। बाहर जाने से बचे, यदि बाहर जाना आवश्यक है, तो अपने सिर (कपड़े/टोपी या छाता) और चेहरे को कवर करें। जहां तक संभव हो किसी भी सतह को छूने से बचें।

 

*क्या न करें-* गर्मी के दौरान बाहर न जाए, यदि आपको आवश्यक कार्य के लिए बाहर जाना है तो दिन के शीतलन घंटो के दौरान अपनी सारणी निर्धारित करने का प्रयास करें। अत्यधिक गर्मी के घंटो के दौरान बाहर जाने से बचे (विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच), नंगे पैर या बिना चेहरे को ढ़के और बिना सिर ढककर बाहर न जाए। व्यस्थतम समय (दोपहर) के दौरान खाना पकाने से बचे, खाना पकाने वाले क्षेत्रों (रसोई घरों) में दरवाजे और खिड़कियां खोल कर रखें, जिससे पर्याप्त रूप से हवा आ सके। शराब, चाय, कॉफी और कार्बाेनेटेड पेय, पीने से बचे जो शरीर को निर्जलित करते हैं। उच्च प्रोटीन, मसालेदार और तेलीय भोजन खाने से बचे, बासी खाना न खाए। बीमार होने पर बाहर धूप में न जाए, घर पर रहे।

 

*अन्य सावधानियां-* जितना हो सके घर के अंदर रहें। अपने घर को ठंडा रखें-धूप से बचाव के लिए दिन में पर्दे, शटर का उपयोग करें और खिड़कियां खोलें। निचली मंजिलों पर बने रहने का प्रयास करे। पंखों का उपयोग करें, कपड़ों को नम करें और अधिक गर्मी में ठंडे पानी में ही स्नान करें। यदि आप बीमार महसूस करते हैं-उच्च बुखार/लगातार सिरदर्द/चक्कर आना/मतली या भटकाव/लगातार खांसी/सांस की तकलीफ है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाये। जानवरों को छाया में रखे और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें। इन उपायों का उपयोग कर लू एवं हीटवेव के प्रभाव से बचा जा सकता है।

 

*वरिष्ठ नागरिकों और फील्ड स्टाफ के लिए निर्देश*

 

वृद्धजनों और धूप में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के लिए भी विशेष रूप से गाइडलाइन जारी की गई है, ऐडवायजरी अनुसार जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं, उनकी नियमित जांच और देखभाल सुनिश्चित करने को कहा गया है। यदि किसी वृद्ध को असामान्य रूप से भूख कम लगना, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है। समाज के हर वर्ग और व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए विस्तृत कार्ययोजना सौंपी गई है।

 

*जिला प्रशासन द्वारा ’लू कार्य योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई है-*

 

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को गर्मी के दौरान सार्वजनिक स्थलों, आश्रय स्थलों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, लू के दौरान बाहरी गतिविधियों और कार्यों पर प्रतिबंध के संबंध में विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। शहरी क्षेत्रों में ’ग्रीन कवर’ बढ़ाने हेतु छतों पर उद्यान और शहरी वन विकसित करने के प्रयासों को गति दी जाएगी। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को ग्रामीण स्तर पर लू से बचाव का प्रशिक्षण आयोजित करने और समस्त स्वास्थ्य केंद्रों में लू प्रभावित मरीजों के लिए दवाओं व उपचार की विशेष व्यवस्था करने को कहा गया है। गंभीर स्थिति में सहायता के लिए महतारी एक्सप्रेस (108/104) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। विद्युत विभाग को भीषण गर्मी और लू की अवधि के दौरान अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और पेयजल आपूर्ति केंद्रों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर प्राथमिकता के आधार पर निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग को जिले के समस्त शिक्षण संस्थानों में शीतल पेयजल, ओ.आर.एस. और आइस पैक की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। भीषण गर्मी की स्थिति को देखते हुए शिक्षण संस्थानों के समय में आवश्यक परिवर्तन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वैच्छिक संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजारों में ’प्याऊ’ घरों तथा शुद्ध पेयजल व छाछ की व्यवस्था करने को कहा गया है। पुलिस व यातायात कर्मियों को ड्यूटी के दौरान हल्के रंग की टोपी या छतरी का प्रयोग करने, सनग्लासेस पहनने और पर्याप्त पानी पीने के निर्देश दिए गए हैं। यथासंभव युवा कर्मियों को दिन की यातायात ड्यूटी में तैनात करने का सुझाव दिया गया है।

श्रम एवं रोजगार विभाग को उद्योगों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। गर्मी के समय (दोपहर 12.00 बजे से 3.00 बजे तक) बाहरी काम और लू से बचाने के लिए कार्यकालीन समय में परिवर्तन किया जाएगा। साथ ही, कार्यस्थलों पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर मजदूरों के लिए ’आइस पैक’ (बर्फ की थैली) उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशुओं को लू से बचाने के लिए जमीनी स्तर पर कर्मचारियों और गौपालकों को सक्रिय किया गया है। पशुओं के लिए पर्याप्त छाया, चारा (भूसा, पानी) और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ आवश्यक दवाइयों का भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों के लिए कार्य अवधि में बदलाव किया जाएगा। कार्य स्थलों पर पीने का पानी और छाया (शेड) की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाएगी। परिवहन एवं पर्यटन विभाग द्वारा जिले के मुख्य बस स्टैंडों और टर्मिनलों पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के पर्यटन स्थलों और मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अस्थाई छाया, आश्रय स्थलों का निर्माण और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। वन एवं अग्निशमन विभाग द्वारा जंगलों को आग से बचाने के लिए निरंतर निगरानी रखी जाएगी। वन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों और जंगली जानवरों व पक्षियों के लिए पेयजल की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। अग्निशमन विभाग को आग की घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त पानी की आपूर्ति और संचार उपकरणों को अलर्ट मोड पर रखने को कहा गया है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राज्य और जिला स्तर पर लू की स्थिति की निगरानी के लिए एक ’डैश बोर्ड’ तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से एसएमएस और नेटवर्क के जरिए लोगों को समय-समय पर मौसम और बचाव के संदेश प्रसारित किए जाएंगे।

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